Thursday, 21 February 2019

इस महिला ने पकड़ा है 350 से भी ज्यादा सॉंप।




अगर आम लोगों का पाला कभी सांप से पड़ता है तो लोगों की डर के मारे हालत खराब हो जाती है लेकिन रायपुर में रहने वाली महिला डॉक्टर मंजीत कौर बल सांपो को देखते ही उसे पकड़ने के लिए दौड़ जाती हैं. डॉक्टर मंजीत कौर बल पिछले १८ वर्षों से सांपो को पकड़ने और सांपों के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं. अब तक डॉक्टर मंजीत कौर बल ३५० से भी ज्यादा सांपो को पकड़ चुकी हैं. मंजीत कौर का सांपों के प्रति प्यार उनके छोटे भाई हर्षजीत सिंह बल की वजह से आया है. मंजीत बताती हैं कि बचपन के दिनों में जब कोई सांप को मारता था तो अक्सर हर्षजीत उन्हें मना किया करते थे. वर्ष २०१४ में मंजीत की मुलाक़ात नोवा नेचर ग्रुप से हुई थी. नोवा नेचर ग्रुप में मंजीत ने सांप पकड़ने के नए नए तरीकों को जाना था. मंजीत ने बताया है की निमोरा ग्राम में काम करने के दौरान उन्होंने बहुत सारे कोबरा सांपो को पकड़ा था. मंजीत ने निमोरा ग्राम में सबसे ज्यादा कोबरा सांप निकाले हैं. उस मोहल्ले के लोग साँपों के आतंक से काफी डरे हुए थे. मंजीत ने वहां के बच्चो को भी सांप पकड़ने की तकनीक सिखाई है. मंजीत का इन सांपो को पकड़ कर मारना नहीं होता है वह इन सांपो को पकड़ कर जंगल में छोड़ देती है. मंजीत ने सबसे जहरीले सांप रसल वाईपर को भी पकड़ा है और अब तक वो ५० से ज्यादा लोगो को सांप पकड़ना सीखा चुकी है.

आखिर क्या रहस्य है इस रंग बिरंगी नदी का। Cano Cristales | Colombia




दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया में एक ऐसा नदी है जो इंद्रधनुष के रंगो की तरह रंग बिरंगे रंगो में रंगा हुआ है. इस नदी का नाम कानो क्रिस्टालेस है. यह नदी वर्ष में छह माह तक खूबसूरत रंगो के मिश्रण से सराबोर रहता है. इस नदी में आपको पीले नीले लाल हरे और काले रंगो का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है. यह अद्भुत नदी गयाना शील्ड रॉक फार्मेशन पर पाया जाता है. यह रॉक फार्मेशन १२० करोड़ साल पुराना फार्मेशन है. इस रॉक फार्मेशन को विश्व का सबसे प्राचीन ज्योग्राफिकल फार्मेशन माना जाता है. इस रॉक फार्मेशन के ट्रॉपिकल फारेस्ट में धरती के शुद्धपानी का १५ प्रतिशत हिस्सा पाया जाता है. इसी १५ प्रतिशत का कुछ अंश कानो क्रिस्टालेस नदी के अंदर गिरता है. जुलाई में कोलंबिया के बरसाती मौसम के अंत में कानो क्रिस्टालेस नदी का पानी का स्तर नीचे आ जाता है. इसकी वजह से वहाँ के पानी में पैदा होने वाले पौधों को खिलने का अनुकूल वातावरण मिल जाता है. माकारेनिया क्लाविगेरा नाम के पानी में पैदा होने वाले पौधों के वजह से कानो क्रिस्टालेस नदी में तरह तरह के रंग खिल के नज़र आते हैं. कानो क्रिस्टालेस नदी सिएरा दे ला माकारेना नेचुरल पार्क का हिस्सा है. यह पार्क जुलाई से नवंबर तक खुला रहता है. इस नदी को देखने के लिए केवल २० लोगो को ही प्रतिदिन पार्क में आने दिया जाता है जिससे आस पास के परिवेश को नुक्सान नहीं पहुंचे.

इन पांच देशों में बलात्कारियों को मिलती है ऐसी सजा जिसे सुनकर आपके रूह काँप जाएंगे।




भारत में निर्भया काण्ड के बाद से रेप की घटना दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है. हर रोज़ आप एक नयी रेप की घटना को सुनते है. अब हालात तो ऐसे हो गए है की चौदह महीने की बच्चियों का भी रेप हो रहा है. जहां औरतों को देवी के रूप में पूजा जाता हो वहां इस तरह की घटना देश को शर्मशार कर देने वाली घटना है. रेप के लिए हमारे देश में कानून बनाये गए है लेकिन वह कुछ ऐसे नहीं है जिससे लोगों की आत्माये हिल जाएँ. दुनिया में कुछ ऐसे भी देश है जहां बलात्कारियों को ऐसी सजा दी जाती है जिसको सुन कर आपके होश उड़ जाएंगे. चीन एक ऐसा देश है जहां बलात्कारियों को सीधे मौत की सजा सुनाई जाती है. कुछ गंभीर मामलों में तो दोषी के लिंग को काट कर उसको मरने के लिए छोड़ दिया जाता है. ऐसा ही एक देश ईरान है जहां बलात्कारियों को लोगो के बीच में ले जाकर फांसी पर लटका दिया जाता है. कभी कभी दोषी को पीड़ित के द्वारा मौत की सजा माफ़ भी हो जाती है उस हालत में दोषी को १०० कोड़े मार कर छोड़ दिया जाता है. अफ़ग़ानिस्तान एक ऐसा देश है जहां बलात्कारियों को चार दिन के अंदर सजा मिल जाती है. अफ़ग़ानिस्तान में दोषी को सर में गोली मारकर सजा दी जाती है. सऊदी अरब भी किसी और देश से कम नहीं है. सऊदी में बलात्कारियों को एक दिन के अंदर सजा सुनाई जाती है. सऊदी में बलात्कारी को बीच सड़क पर ले जाकर उसके सर को धड़ से अलग कर दिया जाता है. इन सभी देशों में से भी सबसे कड़ी सजा जहां दी जाती है उसका नाम greece है. greece में अगर बलात्कार का जुर्म साबित हो जाता है तो बलात्कारी को एक खम्बे से बांधकर जला दिया जाता है. हमारे देश में भी ऐसा ही कुछ कदम उठाना पड़ेगा जिससे बलात्कारियों के दिल में खौफ बैठा पाए.

Neele Neele Ambar Par के Singer Nitin Bali का Car Accident में मौत।




बॉलीवुड के पॉप सिंगर नितिन बाली का सोमवार रात को सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है. ४७ वर्षीय नितिन बाली सोमवार रात को बोरीवली से अपने घर मलाड को जा रहे थे रास्ते में उनका कार एक divider से टकरा गया. नितिन को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाया गया वहां उनको चेहरे पर टाँके लगाए गए और दवाई देकर घर जाने की इजाजत दे दी गयी. लेकिन घर पहुँचते ही नितिन बाली को खून ki उलटी होने लगी और उनके दिल की धड़कन तेज हो गयी. उन्हें फिर से अस्पताल की ओर ले जाया गया लेकिन रस्ते में ही उन्होंने अपना दम तोड़ दिया. नितिन बाली ने नब्बे के दशक में बहुत से मशहूर रीमिक्स गाने गाये थे. नीले नीले अम्बर पर और छूकर मेरे मन को जैसे गाने के रीमिक्स नितिन बाली के कुछ फेमस गानो में से हैं. हम ए के एस न्यूज़ की तरफ से नितिन बाली की आत्मा की शान्ति के लिए प्राथना करते हैं.

पत्नी की गलती की वजह से Ahmed Shehzad पर लगा चार महीने का बैन।




पाकिस्तान के cricketer अहमद सहज़ाद पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के द्वारा चार महीने का प्रतिबन्ध लगाया गया था. अहमद सहजाद कुछ दिनों पहले डोपिंग टेस्ट में फेल हो गए थे लेकिन अब इसमें एक नयी बात सामने आयी है. अहमद सहज़ाद को ड्रग्स देने वाला और कोई नहीं बल्कि उनकी अपनी पत्नी ही थी. दरअसल अहमद सहज़ाद को पाकिस्तान कप टूर्नामेंट में 3 मई को बलूचिस्तान के लिए मैच खेलना था. मैच वाले दिन जब वह सुबह सो कर उठे तो उन्हें चक्कर आया तब सहज़ाद ने अपनी पत्नी से दवा मांगी. सहज़ाद इस तरह की समस्या आने पर आमतौर पर ग्रेविनेट नाम की दवा खाते हैं. उनकी पत्नी ने सहज़ाद को गलती से ग्रेविनेट की जगह cancer की दवाई दे दी जो सहज़ाद की माँ लिया करती हैं. इसी वजह से यूरिन टेस्ट के दौरान उनके सैंपल में प्रतिबंधित टी एच सी वन की मात्रा पायी गयी थी. सहज़ाद अपनी इन बातो को साबित करने के लिए अपनी माता के दवाओं की पर्ची और अन्य मेडिकल रिकार्ड्स पेश किये. सहज़ाद ने अपना character certificate भी दिया जिसपर डोप टेस्ट के समय मौजूद रहे फिजियो मुख्य कोच मिकी arthur पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक़ और all rounder शोएब मलिक के हस्ताक्षर थे. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इन दस्तावेजों से संतुष्ट होने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा की अहमद सहज़ाद से जो हुआ वो अनजाने में हुआ इसलिए उनके ban को back date से लागू किया जाएगा.

Navratri 2019 : नवरात्री के हर दिन अगर ऐसा किया तो खुल जायेगी आपकी किस्मत।




हिन्दू धर्म में नवरात्री बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है. नवरात्री की तैयारियां लोग पर्व शुरू होने से पहले ही करने लगते है. नवरात्री में माता दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा की जाती है और पूजा के दौरान नौ दिन तक व्रत भी रखा जाता है. नवरात्री में माता दुर्गा के हर एक रूप की पूजा होती है. हर दिन अलग अलग रूप की पूजा की जाती है. इसी तरह से पूजा के हर दिन आप किस रंग के कपड़े पहन रहे हैं यह भी काफी मायने रखता है. पूजा करने के लिए मां के स्वरूप के अनुसार कपड़ों के रंग का चयन करना अच्छा होता है और यह आपके लिए फलदायी भी होता है. तो आइये जानते है माता के रूप के अनुसार हर दिन के अलग रंग के कपड़ो के बारे में. नवरात्री के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन अगर आप पीले रंग के कपड़े पहनते है तो यह आपके लिए काफी शुभ रहता है. दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है. इस दिन हरे रंग के कपड़े का खासा महत्तव होता है. इस दिन आपको हरे रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए. नवरात्री के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा होती है और इस दिन आपको ग्रे यानि स्लेट पेंसिल के रंग के कपड़े पहनने चाहिए. नवरात्री के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा की जाती है. इस दिन नारंगी रंग के कपड़े को काफी शुभ माना जाता है. नवरात्री के पांचवे दिन माता स्कंदमाता की पूजा होती है. इस दिन अगर आप सफ़ेद रंग के कपड़े पहनते है तो वह आपके लिए काफी शुभ माना जाता है. नवरात्री के छठे दिन माता कात्यानी की उपासना की जाती है. इस दिन लाल रंग का कपड़ा आपके लिए शुभ होता है. सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है और इस दिन नीले रंग का बहुत महत्तव होता है. इस दिन अगर आप नीले रंग के कपड़े धारण करते है तो वह आपके लिए बहुत शुभ होता है. नवरात्रि के आठवे दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है. इस दिन अगर आप गुलाबी रंग के कपड़े पहनते है तो वह आपके लिए शुभ माना जाता है. नवरात्रि के आखिरी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा होती है. इस दिन आपको बैंगनी रंग के कपड़े पहनने चाहिए. इस दिन बैंगनी रंग आपके लिए शुभ माना जाता है.

इस खिलाड़ी की गलती के वजह से सौ का औसत बनाने से चूके थे ब्रैडमैन।




दुनिया में क्रिकेट के डॉन माने जाने वाले ऑस्ट्रेलिया के डोनाल्ड ब्रैडमैन केवल चार रन से टेस्ट क्रिकेट में 100 का औसत हासिल नहीं कर पाये थे. इंग्लैंड के लेग स्पिनर एरिक होलीज़ ने ब्रैडमैन को उनकी अंतिम पारी में शून्य पर बोल्ड कर दिया था और उनका औसत 99.94 पर ही अटक गया था. लेकिन ब्रैडमैन की आखिरी मैच से पहले के मैच में ब्रैडमैन के साथ खेलने वाले खिलाड़ी नील हारवे चाहते तो ब्रैडमैन १०० की औसत का रिकॉर्ड बना सकते थे. ब्रैडमैन के आखिरी मैच से पहले लीड्स में खेले गये मैच में नील हारवे ने पहली पारी में 112 रन बनाये थे. वह दूसरी पारी में तब क्रीज पर उतरे जब आस्ट्रेलिया को जीत के लिये केवल चार रन की दरकार थी और उन्होंने पहली गेंद पर ही चौका जड़कर टीम को जीत दिला दी थी. ब्रैडमैन उस समय दूसरे छोर पर 173 रन बनाकर खेल रहे थे और अगर यह विजयी चौका उनके बल्ले से निकला होता तो इस समय उनका औसत १०० का होता. नील हारवे अभी भी जीवित हैं और आठ अक्टूबर को अपना ९०वा जन्मदिन मनाने वाले है. मीडिया से बातचीत करते हुए नील ने कहा की लीड्स में बनाये गये उन चार रन से मैं आज भी अपराधबोध से ग्रस्त हो जाता हूं. यह पूरी तरह से मेरी गलती थी जो ब्रैडमैन टेस्ट क्रिकेट में 100 का औसत हासिल नहीं कर पाये. अगर वे चार रन मेरे बजाय उन्होंने बनाये होते तो वह यह उपलब्धि हासिल कर लेते. हारवे ने आगे कहा की मैं दोष लेने के लिये तैयार हूं लेकिन तब आंकड़ों का जिक्र नहीं होता था. टेलीविजन नहीं था और किसी पत्रकार को भी इसका अहसास नहीं था. जब वह आउट हो गये तब इसके बारे में पता चला. इंग्लैंड पहली पारी में 52 रन पर आउट हो गया था इसलिए उन्हें बचे चार रन बनाने का दूसरा मौका नहीं मिला.

एक खम्बे पर टिका 872 साल पुराना मंदिर पूरी होती है यह मनोकामना। Ganlu Temple




दक्षिण पश्चिम चीन में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है जिसके बारे में जान कर आपके होश उड़ जाएंगे . यह मंदिर चीन की पहाड़ियों में बना हुआ है. इस मंदिर का नाम गंलु मंदिर हैं. इस मंदिर की सबसे ख़ास बात यह है की यह केवल एक खम्बे के सहारे खड़ा हुआ है. गंलु मंदिर तक़रीबन ८७२ साल पुराना है. मंदिर जमीन से २६० फ़ीट की ऊंचाई पर बनाया गया है. मंदिर से जुड़ी मान्यता है की जिन दम्पतियों को औलाद नहीं होती है अगर वह यहाँ पर आकर मंदिर में दर्शन करते है तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है. वर्षों पूर्व इस मंदिर का निर्माण जुकिया नामक शाषक ने किया था. कहा जाता है की जुकिया ने इस मंदिर का निर्माण अपनी माता की याद में करवाया था. मंदिर में कई लोग अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए आते हैं वहीँ कई लोग इसकी बनावट और डिज़ाइन को देखने के लिए आते हैं.

दक्षिण अफ्रीका के इस नेत्रहीन खिलाड़ी ने बनाया टी-20 क्रिकेट में दोहरा शतक। Frederik Boer




दक्षिण अफ्रीका के प्रीटोरिया में ब्लाइंड टी ट्वेंटी टूर्नामेंट में खेल रहे एक नेत्रहीन खिलाड़ी ने ट्वेंटी ट्वेंटी मैच में दोहरा शतक लगा कर कमाल कर दिया है. फ्रेडरिक बोएर नाम के इस खिलाड़ी ने मात्र ७८ गेंदों में ३९ चौके और ४ छक्के की मदद से २०५ रन बनाये है. ट्वेंटी ट्वेंटी मैच में दोहरा शतक लगाना वो भी एक नेत्रहीन खिलाड़ी के द्वारा एक बहुत बड़ी बात है. बोएर ने अपनी पारी के २०५ रनो में १८० रन केवल छक्के और चौक्कों से ही बनाये हैं. बोएर अपनी इस पारी से रातो रात स्टार बन गए हैं. बोएर अब दक्षिण अफ्रीका के पहले बल्लेबाज बन गए हैं जिन्होंने टी ट्वेंटी में दोहरा शतक लगाया है. यह मैच ब्लाइंड क्रिकेट नेशनल साउथ अफ्रीका टूर्नामेंट में बोलैंड की टीम और फ्री स्टेट की टीम के बीच खेला जा रहा था. बोएर बोलैंड टीम के तरफ से खेल रहे थे. बोलैंड की टीम पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी थी. जिसमे बोएर ने २०५ रनो की आतिशी पारी खेली और उनके साथी बल्लेबाज़ शेपर्ड मंगाबा ने भी ५३ गेंदों में ९७ रन बनाये थे. पारी की अंतिम गेंद पर बोएर रन आउट हो गए. बोएर और मंगाबा के बीच ३१९ रनो की साझेदारी हुई. यह भी अपने आप में एक कमाल का रिकॉर्ड है. बोलैंड की टीम ने निर्धारित २० ओवरों में ३१९ रन बनाये थे. जवाब में खेलने आयी फ्री स्टेट की टीम २० ओवरों में ६ विकेट खोकर १५५ रन ही बना सकी. बोलैंड ने इस मैच को १६४ रनो से जीत लिया.

Prithvi Shaw : जानिए बिहारी मूल के इस नए चमकदार सितारे के बारे में।




पृथ्वी शॉ ने वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक लगा कर के अपनी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर का शानदार आगाज़ किया है. १८ वर्ष और ३२९ दिन के पृथ्वी भारत के तरफ से अपने पहले ही मैच में शतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं. मुंबई के विरार में रहने वाले पृथ्वी का राजकोट तक का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है. पृथ्वी के पिता अशोक शॉ मूल रूप से बिहार के गया से हैं लेकिन वो बहुत पहले ही मुंबई आ गए थे. केवल चार वर्ष के उम्र में पृथ्वी की माँ का देहांत हो गया था. उसके बाद पृथ्वी के पिता ने ही उसका ध्यान रखा है. बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रखने वाले पृथ्वी को उनके पिता का पूरा सहयोग मिला है और पृथ्वी को आगे बढ़ाने में उनका काफी योगदान है. पृथ्वी शॉ पहली बार हैरिस शील्ड ट्रॉफी में खेलते हुए नज़र में आये थे. इस ट्रॉफी में पृथ्वी ने अपने स्कूल रिजवी स्प्रिंगफील्ड के लिए 546 रन बनाए थे. पृथ्वी शॉ ने रणजी ट्रॉफी में भी डेब्यू मैच में ही शतक लगाया था. एक के बाद एक शानदार परफॉरमेंस देने के बाद पृथ्वी को इंडिया अंडर nineteen टीम का कप्तान चुना गया था. यहां तो पृथ्वी ने कमाल ही कर दिया और भारत को विश्व कप का खिताब दिलवा दिया. पृथ्वी ने दिलीप ट्रॉफी में भी अपने पहले ही मैच में शतक ठोक दिया था. भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिलने से पहले इंडिया ए के लिए खेलते हुए पृथ्वी ने ढ़ेर सारे रन बनाये थे. पृथ्वी शॉ को इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी दो टेस्ट मैच के लिए भारतीय टीम में जगह दी गई थी लेकिन उन्हें डेब्यू करने का मौका वेस्टइंडीज के खिलाफ ही मिला है. पृथ्वी शॉ ने एक level से दूसरे level तक काफी जल्दी ही तरक्की की है. उन्होंने किसी level को jump नहीं किया बल्कि अपने खेल के दम पर वो एक से दूसरे level तक पहुंचे है. आज पृथ्वी जब बल्लेबाज़ी कर रहे थे तब ऐसा लग रहा था की वो ५० टेस्ट मैच का अनुभव लेकर के आए हैं. अगर पृथ्वी ऐसे ही बल्लेबाज़ी करते रहे तो वो भारतीय टीम के साथ लम्बे समय तक जुड़े रह सकते है.